मुंबई के उस सुनसान कॉलेज में उस रात क्या हुआ? | तीन दोस्तों की डरावनी कहानी

हॉन्टेड कॉलेज की कहानी सुनने में जितनी डरावनी लगती है, उससे कहीं ज्यादा रहस्यमयी वह रात थी जब तीन दोस्त मुंबई के एक सुनसान कॉलेज के अंदर पहुंचे।

मुंबई जैसे शहर में रात कभी पूरी तरह शांत नहीं होती…

कहीं गाड़ियों की आवाज़ होती है, कहीं लोकल ट्रेन की, कहीं देर रात तक खुले रहने वाले इलाकों की हलचल।

लेकिन उसी मुंबई में कुछ ऐसी पुरानी इमारतों को लेकर भी कहानियाँ सुनाई जाती हैं, जिनके बारे में लोग दिन में तो हंसकर बात कर लेते हैं… लेकिन रात में उनके पास जाने से बचते हैं।

ऐसी ही एक कहानी एक पुराने कॉलेज से जुड़ी बताई जाती है।

स्थानीय किस्सों में दावा किया जाता था कि रात के समय उस इमारत से कभी किसी के चलने की आवाज़ आती है, कभी चीखने जैसी आवाज़ें और कभी सफेद कपड़ों में किसी महिला को देखने की बातें कही जाती थीं। इन दावों का कोई ठोस प्रमाण हमारे पास नहीं है, इसलिए आगे की कहानी को एक प्रचलित डरावनी कथा के रूप में ही पढ़ें। मूल कहानी में भी ऐसे ही स्थानीय दावों का जिक्र किया गया है।

लेकिन निखिल, अनिल और भूमि के लिए ये बातें डरने की वजह नहीं थीं।

बल्कि उस रात…

यही बातें वहां जाने की वजह बन गईं।

रात करीब 2 बजे

निखिल, अनिल और भूमि काफी अच्छे दोस्त थे।

एक रात बातचीत के दौरान उसी कॉलेज की चर्चा निकल आई।

किसी ने कहा कि वहां रात बिताना आसान नहीं है। किसी ने पुराने किस्से सुनाए। बातों-बातों में तीनों ने तय कर लिया कि दूसरों की बातें सुनने से बेहतर है खुद जाकर देखा जाए।

प्लान सीधा था।

रात में कॉलेज जाएंगे। अंदर घूमेंगे। वीडियो बनाएंगे और सुबह लगभग छह बजे वापस लौट आएंगे।

तीनों में भूमि शायद सबसे ज्यादा उत्साहित थी।

निखिल के लिए मामला थोड़ा अलग था।

वह भूमि को पसंद करता था, लेकिन उसने कभी उससे खुलकर नहीं कहा था। वह सोच चुका था कि कुछ दिनों में भूमि को अपने दिल की बात बताएगा। शायद इसी वजह से उस रात वह उसके सामने डरना भी नहीं चाहता था। मूल कथा भी निखिल की इसी भावना को कहानी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रखती है।

रात करीब दो बजे वे कॉलेज के बाहर पहुंचे।

मुख्य गेट बंद था।

कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने वही किया जो शायद उन्हें नहीं करना चाहिए था।

वे गेट पार करके अंदर चले गए।

अंदर सब कुछ सामान्य था… शुरुआत में

इमारत बड़ी थी।

लंबे कॉरिडोर, पुराने कमरे, जगह-जगह पड़ी बेंचें और रात का सन्नाटा।

तीनों मोबाइल की रोशनी और बाहर से आती हल्की चांदनी में आगे बढ़ते रहे।

पहली मंजिल पर पहुंचने के बाद भी कुछ असामान्य नहीं हुआ।

कुछ देर बाद निखिल और अनिल आपस में बातें करने लगे।

दोनों चलते रहे…

फिर अचानक निखिल को महसूस हुआ कि काफी देर से भूमि ने कुछ नहीं कहा।

उसने पीछे मुड़कर देखा।

भूमि वहां नहीं थी।

सुनसान कॉलेज में गायब हुई भूमि
कुछ देर पहले तक साथ चल रही भूमि अचानक कॉरिडोर से गायब हो चुकी थी।

कुछ सेकंड पहले तक वह उनके साथ चल रही थी।

अब पीछे सिर्फ खाली कॉरिडोर था।

“भूमि?”

निखिल ने आवाज़ लगाई।

कोई जवाब नहीं।

उसने दोबारा जोर से पुकारा।

“भूमि!”

आवाज़ पूरे खाली कॉलेज में गूंजकर वापस आई।

लेकिन भूमि की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

फिर सामने से किसी ने दरवाजा पीटना शुरू किया

दोनों उसे खोजते हुए कॉरिडोर में आगे बढ़े।

तभी इमारत के दूसरे हिस्से से तेज आवाज़ सुनाई दी।

धड़ाम… धड़ाम… धड़ाम…

जैसे कोई बंद दरवाजे को अंदर से पीट रहा हो।

दोनों रुक गए।

फिर आवाज़ आई—

“खोलो!”

वह भूमि की आवाज़ थी।

दोनों आवाज़ की तरफ दौड़े।

वह महिलाओं का वॉशरूम था।

दरवाजा खोला गया तो भूमि अंदर थी।

उसके बाल बिखरे हुए थे। वह पसीने में भीगी हुई थी और बाहर निकलते ही रोते हुए अपने दोस्तों से पूछने लगी—

“मुझे अंदर बंद करके क्यों चले गए?”

निखिल और अनिल एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।

उन्होंने भूमि को बंद नहीं किया था।

उनके मुताबिक वह उनके साथ ऊपर आई थी और फिर अचानक गायब हो गई थी।

कुछ देर तक तीनों इसी बात पर उलझे रहे।

और तभी भूमि का व्यवहार अचानक बदल गया।

कुछ क्षण पहले तक रो रही भूमि एकदम सामान्य हो गई।

उसने बस इतना कहा—

“कोई बात नहीं… चलो आगे देखते हैं।”

एक कॉरिडोर जो खत्म ही नहीं हो रहा था

तीनों फिर आगे बढ़े।

लेकिन कुछ मिनट बाद अनिल को लगा कि कुछ ठीक नहीं है।

जिस रास्ते को पार करने में मुश्किल से दो-तीन मिनट लगने चाहिए थे, वे उसी पर पांच-दस मिनट से चलते जा रहे थे।

कॉरिडोर खत्म ही नहीं हो रहा था।

अनिल ने मोबाइल की flashlight चालू की।

उसने सामने देखा।

फिर पीछे।

और तभी…

पीछे से एक अजीब सी आवाज़ आई।

दोनों पलटे।

भूमि उनके साथ नहीं चल रही थी।

कुछ दूरी पर एक पुराना dustbin पड़ा था।

और भूमि उसके सामने झुकी हुई थी।

उसका सिर लगभग उसके अंदर था।

“भूमि?”

निखिल ने आवाज़ लगाई।

उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।

मोबाइल की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी।

और दोनों कुछ सेकंड के लिए वहीं जम गए।

मूल कहानी के अनुसार उसके मुंह में एक मरा हुआ चूहा था।

अगले ही पल भूमि तेजी से उठी और अंधेरे कॉरिडोर की तरफ भाग गई।

कुछ ही सेकंड में वह एक कमरे के अंदर गायब हो गई।

वह कमरा एक Laboratory थी

पुरानी कॉलेज लैब में टेबल के नीचे छिपी आकृति
मोबाइल की रोशनी पड़ने पर उन्हें टेबल के नीचे कुछ हिलता दिखाई दिया।

अनिल अब वहां से निकलना चाहता था।

लेकिन निखिल भूमि को उस हालत में अकेला छोड़ने के लिए तैयार नहीं था।

दोनों ने तय किया कि अगर वह किसी कमरे में है तो दरवाजा बाहर से बंद करके मदद बुलाएंगे।

वे धीरे-धीरे उस कमरे के पास पहुंचे जिसमें भूमि गई थी।

अंदर से खरोंचने जैसी आवाज़ आ रही थी।

दोनों ने flashlight नीचे कर दी और दरवाजे से अंदर देखा।

पहली नजर में कमरा खाली था।

फिर निखिल की नजर कोने में रखी एक टेबल पर गई।

टेबल के नीचे कुछ हिल रहा था।

उसने मोबाइल की रोशनी उस तरफ की।

बाल दिखाई दिए।

भूमि टेबल के नीचे बैठी थी।

निखिल कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

फिर उसने वह फैसला लिया जिससे अनिल बिल्कुल सहमत नहीं था।

वह कमरे के अंदर चला गया।

निखिल भी बदल गया

अनिल दरवाजे के बाहर खड़ा था।

उसके हाथ में मोबाइल था।

निखिल धीरे-धीरे भूमि के पास पहुंचा।

कुछ क्षण तक कमरे में कोई हलचल नहीं हुई।

फिर कहानी के अनुसार भूमि अचानक उठी।

इसके बाद जो हुआ, वह अनिल के लिए समझ से बाहर था।

कुछ ही क्षणों में निखिल का व्यवहार भी असामान्य हो गया।

अनिल को लगा कि अब वहां रुकना सुरक्षित नहीं है।

वह दरवाजे की तरफ बढ़ा।

और जब निखिल उसकी तरफ तेजी से आने लगा, अनिल ने किसी तरह दरवाजा बंद कर दिया।

उसने कमरे को बाहर से बंद किया…

और भाग गया।

बाहर निकलते समय उसने जो देखा…

अब अनिल के दिमाग में सिर्फ एक बात थी—

कॉलेज से बाहर निकलना है।

वह सीढ़ियों से नीचे भागा।

पीछे से अलग-अलग आवाज़ें आ रही थीं, लेकिन उसने मुड़कर नहीं देखा।

मुख्य गेट के करीब पहुंचकर उसे जमीन पर किसी गेंद के लुढ़कने जैसी आवाज़ सुनाई दी।

कहानी में दावा किया जाता है कि जब उसने नीचे देखा, तो उसे एक ऐसा दृश्य दिखाई दिया जिसे देखकर वह बुरी तरह घबरा गया।

उसने दोबारा देखने की कोशिश नहीं की।

गेट पार किया और वहां से निकल गया।

उसने तुरंत अपने दोस्तों को फोन किया।

कुछ ही समय में कई लोग इकट्ठा हुए और उसके साथ वापस कॉलेज पहुंचे।

लेकिन बंद कमरे में कोई नहीं था

अनिल सभी को उस Laboratory तक ले गया।

वही कमरा जिसे वह बाहर से बंद करके गया था।

दरवाजा खोला गया।

अंदर रोशनी की गई।

लेकिन…

कमरा खाली था।

न भूमि।

न निखिल।

अब सवाल यह था कि अगर दरवाजा बाहर से बंद था तो दोनों बाहर कैसे निकले?

लोग अलग-अलग हिस्सों में फैल गए।

पहली मंजिल देखी गई।

दूसरी मंजिल।

तीसरी मंजिल।

कमरे।

कॉरिडोर।

ग्राउंड।

लेकिन दोनों का कोई पता नहीं चला।

खोजते-खोजते सुबह होने लगी।

और आखिर में कुछ लोग छत पर पहुंचे।

पानी की टंकी के पास दो लोग पड़े थे

कॉलेज की छत पर बेहोश मिले निखिल और भूमि
कई घंटों की तलाश के बाद दोनों कॉलेज की छत पर पानी की टंकी के पास बेहोश मिले—कहानी में ऐसा दावा किया जाता है।

छत का दरवाजा खुला।

कुछ दूरी पर पानी की टंकी थी।

और उसके पास…

निखिल और भूमि बेहोश पड़े थे।

लोग दौड़कर उनके पास पहुंचे।

दोनों जिंदा थे।

लेकिन कहानी के अनुसार उनके कपड़े और बाल पूरी तरह भीगे हुए थे।

सबसे अजीब बात?

पानी की टंकी बंद बताई गई।

दोनों को नीचे लाया गया।

काफी समय बाद पहले भूमि और फिर निखिल को होश आया।

भूमि को उस रात की घटनाएं याद नहीं थीं।

निखिल की याद भी उस Laboratory तक पहुंचने के आसपास खत्म हो जाती थी।

उसके बाद क्या हुआ…

दोनों नहीं बता पाए।

तो उस रात आखिर हुआ क्या था?

यहीं इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल है।

क्या तीनों डर, अंधेरे और पहले से सुनी हुई कहानियों के कारण ऐसी स्थिति में पहुंच गए थे जहां हर सामान्य चीज उन्हें असामान्य लगने लगी?

क्या अनिल ने घबराहट में घटनाओं को अलग तरह से महसूस किया?

या इस कहानी में समय के साथ ऐसी बातें जुड़ती चली गईं जिन्होंने इसे एक पूरी horror legend बना दिया?

हमारे पास इन सवालों का कोई प्रमाणित जवाब नहीं है।

और यही बात साफ रखना जरूरी है—इस कहानी में बताए गए निखिल, अनिल और भूमि के अनुभवों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोत से नहीं होती। मूल वीडियो-स्क्रिप्ट इसे एक डरावनी कहानी के रूप में सुनाती है, न कि पुलिस रिकॉर्ड या किसी सत्यापित जांच रिपोर्ट के रूप में। अंत में कथा यही बताती है कि तीनों बच गए, लेकिन उस रात का अनुभव उनके लिए लंबे समय तक डर का कारण बना रहा।

इसलिए इसे किसी वास्तविक paranormal घटना का प्रमाण मानने के बजाय एक डरावनी urban legend के रूप में पढ़ना ज्यादा उचित है।

लेकिन एक बात जरूर है…

अगर रात के दो बजे किसी सुनसान कॉलेज के कॉरिडोर में आपका दोस्त अचानक गायब हो जाए…

तो शायद आप भी यह जानने के लिए वहां रुकना नहीं चाहेंगे कि आगे क्या होने वाला है।

अगर सुनसान जगहों से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएँ आपको पसंद हैं, तो FactSides पर मौजूद दूसरी Horror Stories और Haunted Places से जुड़ी कहानियाँ भी पढ़ सकते हैं।


⚠️ Disclaimer

यह लेख उपलब्ध कहानी/कथा के आधार पर पुनर्लिखित है। इसमें बताए गए paranormal घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसका उद्देश्य किसी स्थान, संस्था या व्यक्ति के बारे में तथ्यहीन दावा करना नहीं, बल्कि एक प्रचलित horror narrative को कहानी के रूप में प्रस्तुत करना है।

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